तुलसी को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है और वे भगवान विष्णु व श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय हैं। ठाकुर जी का कोई भी भोग तुलसी दल के बिना पूर्ण नहीं माना जाता, और आँगन में तुलसी का पौधा सदियों से भारतीय घर का हृदय रहा है।
सरल दैनिक तुलसी पूजा
- सुबह स्नान के बाद लोटे से तुलसी को जल अर्पित करें।
- शाम को तुलसी के पास घी का दीपक जलाएँ।
- ॐ तुलस्यै नमः का जप करते हुए तीन, पाँच या सात परिक्रमा करें।
- थोड़ा कुमकुम, हल्दी और पुष्प अर्पित कर परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें।
ध्यान रखने योग्य नियम
एकादशी, रविवार और सूर्यास्त के बाद तुलसी दल नहीं तोड़े जाते, और तोड़ने से पहले पौधे को प्रणाम अवश्य करें। एकादशी के भोग के लिए पत्ते एक दिन पहले ही तोड़ लिए जाते हैं। एकादशी के दिन तुलसी को जल नहीं चढ़ाया जाता, क्योंकि उस दिन तुलसी देवी स्वयं व्रत रखती हैं।
जहाँ तुलसी होती है, वहाँ नकारात्मकता टिक नहीं सकती।
पौधे की देखभाल
तुलसी को सुबह की धूप और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी पसंद है। गर्मियों में रोज़ पानी दें, पर गमले में पानी भरा न रहने दें, और मंजरी तोड़ते रहें ताकि पौधा घना रहे। बहुत ठंड में रात को पौधे को ढक दें। तुलसी सूख जाए तो उसे सम्मान सहित बहते जल में प्रवाहित करें या मिट्टी में दबा दें, कभी फेंकें नहीं।
तुलसी विवाह
कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी पर तुलसी का विवाह भगवान विष्णु के स्वरूप शालिग्राम से होता है। यह आनंदमय पर्व विवाह के शुभ मुहूर्तों की शुरुआत करता है। वैष्णव भक्तों द्वारा धारण की जाने वाली तुलसी माला हमारे पूजा सामग्री पृष्ठ पर उपलब्ध है।
चित्र: Holy Basil(Rama,Krishna;Ocimum tenuiflorum).jpg, Diamante Phi, CC BY-SA 4.0, विकिमीडिया कॉमन्स से.



