अग्नि मनुष्यों और देवताओं के बीच दूत हैं। ऋग्वेद का पहला मंत्र अग्निमीळे पुरोहितम् पवित्र अग्नि की ही स्तुति है। हवन हमारी आहुतियों को अग्नि के माध्यम से देवताओं तक पहुँचाता है, जड़ी-बूटियों और घी के धुएँ से घर की वायु शुद्ध करता है और मन को शांत करता है।
आवश्यक सामग्री
- ताँबे या लोहे का छोटा हवन कुंड
- आम की सूखी लकड़ी (समिधा) और कुछ गोबर के उपले
- हवन सामग्री (जड़ी-बूटियाँ, गुग्गुल, तिल और चावल का मिश्रण)
- शुद्ध गाय का घी और आहुति के लिए चम्मच
- कपूर, माचिस, लोटे में जल, फूल और हर व्यक्ति के लिए आसन
विधि
- शुद्धि: स्नान करें, पूर्व की ओर मुख करके बैठें और ॐ अपवित्रः पवित्रो वा बोलते हुए स्वयं पर और कुंड पर जल छिड़कें।
- संकल्प: दाहिने हाथ में जल लेकर अपना नाम, गोत्र और हवन का उद्देश्य बोलें।
- अग्नि प्रज्वलन: कुंड में लकड़ी रखें, कपूर से अग्नि जलाएँ और हाथ जोड़कर अग्नि देव का आवाहन करें।
- आहुति: हर मंत्र के अंत में स्वाहा बोलते हुए घी के साथ थोड़ी सामग्री अग्नि में अर्पित करें। पहले गणेश जी, फिर नवग्रह, फिर गायत्री मंत्र की 11, 21 या 108 आहुतियाँ दें।
- पूर्णाहुति: अंतिम मंत्र के साथ लाल कपड़े में लिपटा सूखा नारियल अर्पित करें, फिर आरती करें और किसी भी भूल के लिए क्षमा माँगें।
स्वाहा का अर्थ है — 'मैं इसे पूर्ण रूप से अर्पित करता हूँ', बिना कुछ बचाए।
आचार्य को कब बुलाएँ
परिवार के साथ छोटा हवन एक सुंदर दैनिक या साप्ताहिक साधना है। गृह प्रवेश, नवग्रह शांति, रुद्राभिषेक या किसी विशेष दोष के लिए हवन में मंत्र और विधि अधिक विस्तृत होती है, जिसे प्रशिक्षित वैदिक आचार्य द्वारा ही कराना चाहिए। इनमें से किसी के लिए आप गुरु जी से परामर्श बुक कर सकते हैं।
चित्र: (A) puja fire, Havanam.jpg, Ravigopal Kesari, CC BY-SA 2.0, विकिमीडिया कॉमन्स से.



