गुरु जी के बारे में जानें
अंतर्राष्ट्रीय भागवत कथा प्रेरक वक्ता एवं वैदिक ज्योतिषी
परहित सेवा से बढ़ कर निज स्वार्थ नहीं हो सकता है,
दुर्बल पर प्रतिघात कभी पुरुषार्थ नहीं हो सकता।
अगर स्वयं श्री कृष्ण सारथी रथ के बन जाएँ मित्रों-
धर्मयुद्ध में कभी पराजित पार्थ नहीं हो सकता है॥
गुरु जी की आध्यात्मिक यात्रा
गुरु जी के बचपन में उनके दादा श्री बाबूराम वत्स जी ने उन्हें कहानियों और धार्मिक प्रार्थनाओं के माध्यम से भगवान कृष्ण से परिचित कराया। वे पूरी रुचि से समर्पित होकर सुनते थे और इतने प्रभावित हुए कि 6 वर्ष की आयु में वे एक प्राचीन वैदिक गुरुकुल चले गए।
उनकी प्रारंभिक शिक्षा विश्व हिंदू परिषद द्वारा स्थापित वद्री भगत वेद विद्यालय, नई दिल्ली में हुई। वेद मूर्ति आचार्य श्री चंद्रभानु शर्मा जी और आचार्य श्री रामकुमार शर्मा जी के मार्गदर्शन में उन्होंने सामवेद और शुक्ल यजुर्वेद माध्यंदिनीय संहिता का गहन अध्ययन किया।
हरियाणा के संत जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री सुदर्शनाचार्य जी महाराज द्वारा स्थापित महाविद्यालय में गुरु जी ने गायत्री उपासना में पूर्णतः लीन होकर रामानुज पूजा पद्धति और कर्मकांड सीखा।
वृंदावन के महान विद्वान भागवत रत्न संत श्री मुनिराज जी महाराज के सानिध्य में गुरु जी ने श्रीमद् भागवत कथा, ज्योतिष, व्याकरण और संगीत विद्या का गहन अध्ययन किया।
गुरु जी ने राजस्थान के किशनगढ़ निम्बार्क तीर्थ में जगतगुरु निम्बार्काचार्य श्री राधासर्वेश्वरशरण देवाचार्य श्री श्री जी महाराज से दीक्षा ली। उनकी धार्मिक लोकप्रियता और उत्कृष्ट उपलब्धियों को देखते हुए देश भर के संतों और आचार्यों ने उन्हें "वैष्णवाचार्य" की उपाधि से सम्मानित किया।
आध्यात्मिक सेवा को समर्पित जीवन
सैकड़ों भागवत कथा का आयोजन
हजारों यज्ञ संपन्न
गौ सेवा के लिए समर्पित
राष्ट्र सेवा और वेद सेवा
अंतर्राष्ट्रीय भागवत कथा प्रेरक वक्ता
विशेषज्ञ वैदिक ज्योतिषी
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