पूजा यंत्र
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पूजा यंत्र

वैदिक मंत्रों से अभिमंत्रित और विधि-विधान से सिद्ध किए गए दिव्य यंत्र। दैनिक पूजा, ध्यान और आध्यात्मिक साधना के लिए उत्तम। ये यंत्र आपके घर और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

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पूजा यंत्र क्या है?

यंत्र हिन्दू और वैदिक परंपराओं में पूजा, ध्यान और आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रयुक्त एक पवित्र ज्यामितीय आकृति है। "यंत्र" शब्द संस्कृत धातु "यम" (नियंत्रण) और "त्र" (यंत्र/साधन) से बना है। प्रत्येक यंत्र एक मंत्र और विशिष्ट देवता की ऊर्जा का दृश्य प्रतिनिधित्व है, जो सटीक गणितीय और ज्यामितीय पैटर्न के साथ ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं को प्रवाहित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

आध्यात्मिक महत्व

यंत्रों को दिव्य मंत्रों का भौतिक रूप माना जाता है। जब यंत्र को विधिवत प्राण प्रतिष्ठा की जाती है, तो यह एक जीवित ऊर्जा क्षेत्र बन जाता है जो उस देवता की शक्ति का विकिरण करता है। तंत्रराज तंत्र और सौंदर्यलहरी जैसे प्राचीन वैदिक ग्रंथों में यंत्रों को आध्यात्मिक प्रगति, भौतिक समृद्धि और दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने के आवश्यक साधन के रूप में वर्णित किया गया है। हिन्दू परंपरा में यंत्र को मूर्ति से भी अधिक शक्तिशाली माना जाता है क्योंकि यह सृष्टि की सूक्ष्म ब्रह्मांडीय ज्यामिति का प्रतिनिधित्व करता है।

सामग्री और शिल्प कौशल

हमारे यंत्र उच्च गुणवत्ता वाले तांबे और पीतल से बनाए जाते हैं, जो आध्यात्मिक ऊर्जा के संचालन के लिए प्रसिद्ध हैं। कुछ प्रीमियम यंत्र बढ़ी हुई शक्ति के लिए स्वर्ण लेपित होते हैं। प्रत्येक यंत्र कुशल कारीगरों द्वारा पारंपरिक वैदिक दिशानिर्देशों का पालन करते हुए हाथ से उत्कीर्ण किया जाता है। प्राचीन शिल्प शास्त्र ग्रंथों में निर्धारित माप, अनुपात और कोणों का सावधानीपूर्वक पालन किया जाता है।

पूजा यंत्र के लाभ

अपने घर या पूजा कक्ष में प्रतिष्ठित यंत्र स्थापित करने से सकारात्मक ऊर्जा का शक्तिशाली क्षेत्र बनता है। यह पूजा के दौरान गहन ध्यान और एकाग्रता में सहायक होता है। यंत्र की नियमित पूजा बाधाओं को दूर करने, समृद्धि आकर्षित करने और घर में शांति व सामंजस्य लाने में सहायक होती है। विभिन्न यंत्र विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति करते हैं — धन आकर्षण से लेकर स्वास्थ्य सुधार तक, नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करने से लेकर आध्यात्मिक ज्ञान बढ़ाने तक।

उपयोग विधि

यंत्र को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके एक स्वच्छ वेदी या पूजा स्थान पर रखें। प्रतिदिन यंत्र के समक्ष दीपक और धूप जलाएं। यंत्र के केंद्र बिंदु (बिंदु) पर ध्यान केंद्रित करते हुए संबंधित मंत्र का जाप करें। यंत्र को मुलायम कपड़े से धीरे से पोंछकर स्वच्छ रखें। इसकी आध्यात्मिक शक्ति बनाए रखने के लिए ताजे फूल अर्पित करें और नियमित पूजा करें। हमारे आचार्य जी प्रत्येक यंत्र के साथ विशिष्ट पूजा विधि प्रदान करते हैं।