festivals 26 फ़रवरी 2026

महा शिवरात्रि: दिव्य जागरण की पवित्र रात्रि

महा शिवरात्रि के गहन आध्यात्मिक महत्व को जानें, भगवान शिव को समर्पित यह पवित्र रात्रि, और व्रत, जागरण तथा पूजा की पारंपरिक विधियों को समझें जो भक्तों को दिव्य चेतना की ओर ले जाती हैं।

Bhaktyoday
महा शिवरात्रि, जिसे "शिव की महान रात्रि" कहा जाता है, हिंदू पंचांग के सबसे आध्यात्मिक रूप से शक्तिशाली त्योहारों में से एक है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाने वाली यह पवित्र रात्रि चेतना को रूपांतरित करने और सच्चे साधकों पर दिव्य कृपा बरसाने की शक्ति रखती है। **शिवरात्रि के पीछे की दिव्य कथा** प्राचीन शास्त्रों के अनुसार, महा शिवरात्रि उस रात्रि की स्मृति में मनाई जाती है जब भगवान शिव ने सृजन, पालन और संहार का लौकिक नृत्य—तांडव—किया था। यह दिव्य नृत्य ब्रह्मांड की शाश्वत लय का प्रतिनिधित्व करता है। एक अन्य महत्वपूर्ण कथा के अनुसार, यह वह रात्रि है जब शिव और पार्वती का दिव्य विवाह हुआ था, जो पुरुष (चेतना) और प्रकृति के मिलन का प्रतीक है। कुछ परंपराओं के अनुसार यह वह रात्रि भी है जब शिव ने अनंत ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट होकर ब्रह्मा और विष्णु को अपने निराकार, असीम स्वरूप का दर्शन दिया था। **रात्रि पूजा का आध्यात्मिक महत्व** अधिकांश हिंदू त्योहारों के विपरीत, महा शिवरात्रि की आराधना रात्रि में होती है। इसका गहरा अर्थ है—रात्रि अज्ञान और अंधकार का प्रतीक है, जबकि जागरण चेतना के जागृत होने का प्रतीक है। रात्रि भर जागरण करके, भक्त प्रतीकात्मक रूप से अज्ञान के अंधकार पर विजय प्राप्त करते हैं। **पवित्र विधियां और अनुष्ठान** शिवरात्रि पर व्रत रखना अत्यंत शुभ माना जाता है। भक्त भोजन से परहेज करते हैं और कुछ जल से भी, पूरे दिन को भगवान शिव को समर्पित करते हैं। रात्रि भर भक्त "ॐ नमः शिवाय" का जाप करते हैं—यह पंचाक्षर मंत्र शिव की दिव्य उपस्थिति का आह्वान करता है। शिवलिंग पर बेल पत्र (बिल्व पत्र) चढ़ाना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। तीन पत्तियों वाला बेल त्रिगुण और त्रिदेव का प्रतिनिधित्व करता है, जो भगवान शिव को विशेष प्रिय है। महा शिवरात्रि केवल एक त्योहार नहीं है—यह आध्यात्मिक जागरण का अवसर है, एक ऐसी रात्रि जब भगवान शिव की दिव्य कृपा सभी सच्चे साधकों की ओर प्रचुरता से प्रवाहित होती है।

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